बांकाशंभुगंज

कोहराम में बदल गयी हंसते खिलखिलाते 4 परिवारों के लिए करमा- धरमा की खुशियां..

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मनोज उपाध्याय/ बांका लाइव : उगते हुए सूरज के साथ मंगलवार की सुबह भी उन 4 परिवारों के लिए आम दिनों की तरह थी। बल्कि आम दिनों से भी बेहतर और कुछ ज्यादा ही खुश गवार थी उनके लिए मंगलवार की सुबह। उनके घरों में भाई बहनों के पारंपरिक लोक पर्व करमा धरमा के आयोजन की तैयारियों की धूम जो थी! बहनों को अपने भाइयों के लिए व्रत रखते और जीभ में कांटे चुभाते हुए करम गुसाईं से दीर्घायु की कामना जो करनी थी..!

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लेकिन उन्हें क्या मालूम कि अपने भाइयों की दीर्घायु के लिए कामना करते हुए बहनों को अपने प्राणों का ही बलिदान कर देना होगा! मंगलवार की ही सुबह कुछ ही पलों में एक नए प्रकरण ने पूरा माहौल बदल कर रख दिया। इस बार उन बहनों को अपनी जीभ में कांटे चुभाते हुए भाइयों के लिए दीर्घायु की कामना करने की नौबत ही नहीं आ पाई। विधाता ने उनके जीवन में ही काटे चुभो दिये। करमा धरमा पर्व की खुशियां कोहराम में बदल गई।

बांका जिला अंतर्गत शंभूगंज प्रखंड के कामतपुर पंचायत अंतर्गत घोषपुर गांव के 4 परिवारों के गम की यह कहानी मंगलवार को जिले भर में, बल्कि जिले की परिधि से बाहर निकल कर आम लोगों को भी गमगीन कर रही है। उनकी हंसती खेलती मासूम बेटियों की करमा धरमा पर्व को लेकर नहाय खाय के सिलसिले में स्नान के दौरान बांध में डूबने से मौत हो गई।

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घोषपुर गांव के अरुण पोद्दार, गोरे लाल यादव, विनेश यादव और प्रमोद यादव के घर मंगलवार को चढ़ते सूरज के साथ ही करमा धरमा की खुशियां गम की बढ़ती गहराइयों के साथ सुर्ख होती चली गईं। अपनी बेटियों क्रमशः सविता कुमारी, नीलू कुमारी, ताप्ती कुमारी और नेहा कुमारी के रूप में करमा धरमा की उनकी खुशियां बांध में डूब गई थीं। इस हादसे ने सिर्फ उनके ही नहीं, बल्कि पूरे गांव और आसपास के कई गांवों में इस बार करमा धरमा की खुशियों को सुर्ख स्याह रंग के गम में बदल डाला है। पर्व में खुशियों की जगह उदासी छाई है। लोगों की आंखों में चमक की जगह नमी कायम है!

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