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त्रासद: बांका जिले की सीमा पर लाकर ऐसे ही छोड़ दिए गए प्रवासी श्रमिक

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बांका- गोड्डा सीमा से : दूसरे राज्यों से बिहार आ रहे प्रवासी कामगार किन हालातों में अपने घर पहुंच रहे हैं, यह उन्हीं से पूछत्रासद कर बेहतर जाना और समझा जा सकता है। वैसे प्रवासी श्रमिकों के साथ बांका जिले की गोड्डा (झारखंड) से लगी सीमा पर आज जो कुछ हुआ, वह भी उनकी त्रासदी को रेखांकित करने के लिए कम नहीं।

दरअसल भागलपुर जिले के तकरीबन दो दर्जन से ज्यादा श्रमिक गुजरात के वापी से वापस अपने घर लौट रहे थे। आज सुबह उन्हें ट्रेन से जसीडीह जंक्शन (झारखंड) में उतारा गया। उन्हें भागलपुर जाना था। लेकिन जो बस वहां उपलब्ध थी, उसके संचालकों ने बिहार में प्रवेश से इनकार कर दिया।

मजबूरी में वे प्रवासी श्रमिक उसी बस पर सवार हुए। बस उन्हें लेकर झारखंड के गोड्डा जिला मुख्यालय चली गई। किसी तरह कहने सुनने के बाद उन्हें गोड्डा- बांका मुख्य मार्ग पर बांका जिले की पंजवारा से लगी गोड्डा सीमा पर उतार दिया गया, यह कह कर कि झारखंड की बस बिहार नहीं जाएगी।

प्रवासी श्रमिक विवश होकर वहीं उतर गए। सीमा पर लगे चेक नाका के समीप एक वटवृक्ष के नीचे उन्होंने डेरा डाला। उनमें से कुछ पंजवारा बाजार की तरफ कुछ खाने पीने का सामान खरीदने की तलाश में पहुंचे तो कुछ पानी के लिए पास की नदी में उतर गए।

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इसकी सूचना पर एक तथाकथित मेडिकल टीम तकरीबन डेढ़ घंटे बाद वहां पहुंची। कहने को तो यह मेडिकल टीम थी, लेकिन टीम में कोई चिकित्सा विशेषज्ञ मौजूद नहीं थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक एक अप्रशिक्षित कर्मी के हाथ में थर्मल स्केनर था, जिन्होंने कुछ प्रवासी श्रमिकों के टेंपरेचर रिकॉर्ड किए।

इन सब औपचारिकताओं में काफी देर बीत जाने के बाद आखिरकार प्रवासी श्रमिकों के सब्र का बांध टूटा और वे वहीं अंतर प्रांतीय सड़क पर उतर कर हंगामा करने लगे। उन्होंने जाम कर दिया। अभी कुछ ही देर उन्होंने जाम किया था कि चेक नाके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने स्थिति की नजाकत भांप ली। उन्होंने प्रवासियों को समझाने की कोशिश की तो समय ने भी उनका साथ दिया।

इसी दौरान गोड्डा की ओर से आ रही एक खाली बस पर पुलिस की नजर पड़ी तो बस चालक और संवाहक को उन्होंने किसी तरह प्रवासी श्रमिकों को भागलपुर तक पहुंचाने के लिए मना लिया। हालांकि चालक और संवाहक इसके लिए तैयार नहीं हो रहे थे। लेकिन कुछ तो पुलिस के दबाव और मौके की मजबूरी काम आई। बस उन प्रवासी श्रमिकों को लेकर भागलपुर के लिए रवाना हो गई। लेकिन तब तक तमाम तरह की पीड़ाओं को झेलते हुए प्रवासी श्रमिक बेहाल हो चुके थे।

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