बांका LIVE डेस्क : बांका जिले में महागठबंधन के अंदरखाने सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है. बल्कि यूं कहें कि बिल्कुल भी ठीक नहीं है. महागठबंधन यहां गठबंधन की तर्ज पर नहीं, बल्कि टांग खिंचाई की तर्ज पर कायम है. महागठबंधन के दो प्रमुख घटक दलों राजद और जदयू के बीच अंदरुनी खींचतान चरम पर है. सांसद जयप्रकाश नारायण यादव और बेलहर के विधायक गिरधारी यादव आमने सामने हैं. सांसद जयप्रकाश नारायण यादव राष्ट्रीय जनता दल के हैं तो विधायक गिरधारी यादव जदयू के. दोनों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता यहां लोकोक्ति बन चुकी है. मजेदार बात है कि इन दोनों की प्रतिद्वंदिता की धार में अक्सर नए चेहरे भी आते-जाते और बहते देखे जाते हैं जो अक्सर पाला बदलते रहते हैं.
सांसद जयप्रकाश नारायण यादव के अलावा बांका जिले के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से चार पर महागठबंधन का कब्जा है. इनमें से तीन पर जदयू और एक पर राजद के विधायक काबिज हैं. लेकिन महागठबंधन होने के बावजूद शायद ही कभी ऐसा मौका आता हो, जब ये सभी विधायक और सांसद एक मंच पर उपस्थित होते और एक स्वर में बोलते हों. इनकी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और वैमनस्य का असर बांका जिले के विकास और प्रगति पर भी पड़ रहा है. उल्लेखनीय तथ्य है कि इस जिले में जनप्रतिनिधियों की भी बहुत अभिरुचि यहां के बुनियादी ढांचागत विकास में नहीं है. तभी तो पिछले 25 वर्षों के दौरान कभी राजद तो कभी जदयू की सरकार होने के बावजूद बांका जिले में आज भी उदाहरण के लिए जिलाधिकारी और आरक्षी अधीक्षक को रहने के लिए अपना सरकारी आवास तक उपलब्ध नहीं है.
सांसद जयप्रकाश नारायण यादव योजनाओं को धरातल पर उतारने के दावे के साथ लगातार इन योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करते चले जा रहे हैं. उधर जदयू विधायक गिरधारी यादव जो पूर्व में सांसद भी रहे हैं, का रोना अलग है. सांसद का कहना है कि वह कहने में नहीं बल्कि करने में विश्वास रखते हैं. विकास कोई भी करें वह उनके साथ हैं. विकास में विवाद के लिए कोई जगह नहीं. लेकिन विधायक गिरधारी यादव का कहना है कि उनके प्रयासों से लाई गई योजनाओं का भी सांसद फटाफट शिलान्यास कर वाहवाही लूट रहे हैं. स्थिति यह है कि एक ओर सांसद सड़क, पुल- पुलिया, सिंचाई नहर और दूसरी योजनाओं को अपने प्रयास से लाने की बात कहते हुए लगातार शिलान्यास और उद्घाटन करते चले जा रहे हैं, दूसरी ओर विधायक गिरधारी यादव अपनी खीज मिटाने के लिए स्पष्टीकरण देने में लगे हैं. खास बात यह भी है कि इन दोनों नेताओं की परस्पर प्रतिद्वंदिता के बीच महागठबंधन के तीसरे कोई विधायक सामने नहीं आते.
हाल में राजद के ही एक पूर्व विधायक रामदेव यादव ने न जाने किन कारणों से सांसद जयप्रकाश नारायण यादव की आलोचना कर दी. उनकी इन आलोचनाओं ने दशकों तक घोर राजनीतिक प्रतिस्पर्धी रहे विधायक गिरधारी यादव को भी उनके करीब ला दिया. हालांकि सांसद जयप्रकाश नारायण यादव ने कभी इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया और ना ही कभी कोई स्पष्टीकरण देने की इस मामले में जरूरत समझी. वह लगातार कहते रहे हैं… विकास कोई करें, विकास होना चाहिए. वह विकास के पक्षधर हैं, विवाद के नहीं. बयानबाजी उनकी फितरत नहीं. वह काम करना चाहते हैं और करते चले जा रहे हैं. जो बकवास करने को राजनीति समझते हैं, वे बकवास करते रहें.
