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EXCLUSIVE : भारी चहल-पहल के बाद एकाएक सुना क्यों पड़ गया भदरिया स्थित पुरावशेष स्थल!

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बांका लाइव ब्यूरो : उम्मीद की जा रही थी कि काम शुरू हुआ है तो अब जारी रहेगा। जल्द ही उस रहस्य पर से पर्दा उठ जाएगा जिसे जानने समझने की उत्सुकता यहां के लोगों को बेसब्री से है। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि कुछ सप्ताह की चहल-पहल के बाद भदरिया स्थित चांदन नदी का पुरावशेष स्थल एक बार फिर से सुना पड़ गया है!

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चहल पहल की इस कहानी की शुरुआत इस वर्ष छठ महापर्व के अवसर पर हुई जब कुछ स्थानीय युवक छठ पर्व के आयोजन के लिए पास ही बहने वाली चांदन नदी के तट पर घाट बनाने गए थे। कहने की जरूरत नहीं कि बालू के बेतरतीब और बेहिसाब उत्खनन की वजह से चांदन नदी सैकड़ों स्थानों पर छोटे-छोटे तालाबों में तब्दील हो गई है। ऐसे ही एक तालाबनुमा गड्ढे में घाट बनाने के प्रयास में युवकों को कुछ अप्रत्याशित दिखा।

यह एक प्राचीन स्ट्रक्चर महसूस किया गया जो दीवार की शक्ल में था। बड़ी-बड़ी ईटों से निर्मित इस दीवार को देख युवा अचंभित हो गए। उन्होंने इसकी सूचना गांव वालों को दी। बड़ी संख्या में लोग उसे देखने पहुंचे। जैसे तैसे बात प्रशासनिक महकमे तक पहुंची। जिला प्रशासन के आला हुक्मरान मौके पर पहुंचे और प्रसंगाधीन स्थल को बैरिकेड करवा दिया गया। हालांकि फिर भी कुछ स्थानीय लोगों को उक्त स्थल से कुछ अनूठे सामान मिले। वैसे वे सामान अब पुरातत्व विभाग के कला संस्कृति अनुभाग के पास हैं।

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इस बीच इस मामले की जानकारी राज्य सरकार तक पहुंची। मुख्यमंत्री ने बड़ी उत्सुकता दिखाई। नीतीश कुमार स्वयं 12 दिसंबर को भदरिया गांव पहुंचे और पूरे मामले से रूबरू हुए। उन्होंने नदी की धार मोड़ कर तेजी से पुरावशेष स्थल की खुदाई करने की दिशा में आगे बढ़ने का निर्देश संबंधित विभागों को दिया। 14 दिसंबर से नदी की धारा मोड़ने आधे दर्जन जेसीबी मशीन नदी की धारा में उतर गए। बालू के बांध बनाए गए। कथित रूप से धारा मोड़ने की कवायद वीरमा गांव तक जाते जाते मोटे तौर पर संपन्न हो गई। मशीनें वापस लौट गईं।

इधर, इसी दौरान पुरातत्व विभाग के तीन प्रतिनिधि भदरिया गांव पहुंचे। कई दिनों तक कैंप किया और नदी में उतर कर छोटे छोटे गड्ढे खोदकर कुछ महत्वपूर्ण स्थलों को चिन्हित भी किया। हालांकि नदी की जो स्थिति है उसमें चिन्हित स्थल अब वे ही नहीं खोज पाएंगे जिन्होंने उन्हें मार्क किया था। पुरातत्व विभाग के ये तीन प्रतिनिधि भी वापस हो गए। लोग अब प्रतीक्षा कर रहे हैं पुरावशेष स्थल की सघन खुदाई की, ताकि मूल बात सामने आ सके। लेकिन करीब डेढ़ सप्ताह बीत जाने के बाद भी उक्त स्थल पर शांति और सूनापन कायम है। आसपास के लोग दूर से ही उक्त स्थल को देखकर संतोष कर रहे हैं।

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क्या कहते हैं जानकार : पुरातत्व और इतिहास के जानकार कहते हैं कि चांदन नदी की धार में मिलने वाला प्राचीन स्ट्रक्चर बौद्ध कालीन हो सकता है। हो सकता है कि यह प्राचीन भद्दई यानी आज के भदरिया के तत्कालीन नगर सेठ मेंडक का महल हो। जनपदीय काल में मेंडक देश के नामी धनपति थे जो कई राज्यों को आर्थिक सहायता किया करते थे। दिग दिगंत तक उनकी चर्चा और ख्याति थी। उनके पुत्र धनंजय थे जिन की पुत्री का नाम विशाखा था। कहते हैं विशाखा 7 वर्ष की उम्र में भगवान बुद्ध की शिष्या बनी थी। विशाखा की ही प्रार्थना पर भगवान बुद्ध भी भद्दई यानी आज के भदरिया की धरती पर पधारे थे और यहां कई दिनों तक रहे थे। माना यह भी जाता है कि वह मेंडक के महल में ठहरे थे। चांदन नदी में मिलने वाला स्ट्रक्चर यदि नगर सेठ मेंडक का महल है तो इसकी खोज राष्ट्रीय फलक पर बिहार के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। बांका जिला भी एक राष्ट्रीय धरोहर बन जाएगा। यह क्षेत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए एक बड़ा धार्मिक केंद्र और पर्यटन स्थल भी बन जाएगा।

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