विचार

‘मोदी जी, इतने बड़े-बड़े पत्थरों का क्या इस्तेमाल करते हो आपलोग ?’

‘बड़ी मेहरबानी, दोस्त। हम इसे तोड़कर पहले पांच-दस गज ज़मीन बनाएंगे और फिर इसपर अपनी सेना तैनात कर देंगे। आप…

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अलविदा चांदन पुल : लेकिन बांका के लोग जानते हैं कि क्यों असमय हमें छोड़ गये गए आप..!

मनोज उपाध्याय/  बांका की जीवन रेखा कहे जाने वाले चांदन पुल ने आज अंतिम सांस ली। पुल का बड़ा हिस्सा…

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‘बाबू देखो ना, क्या बोल रहा है दुकानदार, मेरी तो समझ के बाहर है..!’

संस्मरण/ अमन ईरावई रुपयालु… जानता हूं, ये शब्द आम समझ के बाहर हैं। दरअसल हमारी जो मातृभाषा होती है न, आमतौर…

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हाय! आरक्त कपोल देख, क्या तुम्हें दया न आएगी…

        रूठो ना प्रिय        ********* सौध- सदन में प्रिय हैं ऐसे उर-मिला हेतु खड़े…

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हमारा नहीं तो हमारे बच्चों के रूप में ही सही, काश… लौट आता हमारा बचपन…!

अनिल कुमार आज मैंने चने का होरहालगाया। गांव में तोचने के खेत केकिनारे मेड़ पर हीघास–फूस या पुआल(धान के पौधे…

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बिना किसी गलती के रोज सताते हो, तुम मुझे रोज याद आते हो…

                 तुम्हारी यादें               ————– तुम मुझे रोज़…

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