विचार

हाय! आरक्त कपोल देख, क्या तुम्हें दया न आएगी…

Banka Live On Telegram
        रूठो ना प्रिय
       *********

सौध- सदन में प्रिय हैं ऐसे
उर-मिला हेतु खड़े हों जैसे
परिरम्भण का आमंत्रण या
उपालम्भ है मन-मर्यादा का

कहो प्रिय रूष्ट मन का क्या मान करूं
हो मुदित तुम कैसे तुमको मैं तुष्ट करूं

Banka Live Offer

बांहों का दूं मैं हार प्रिय या
कृष्ण कुन्तलों की छांव हो
अश्रुमाला नयनों की गुंथूं या
सरोज पुट पर हृदय का नैवेद्य हो

कहो प्रिय कहो कैसे प्रीत अपनी मैं पुष्ट करूं
हो मुदित तुम कैसे तुमको मैं तुष्ट करूं

लज्जा छोड़ करूं आज प्रिय कार्य तुम्हारा
तेरे ही सम्मुख लूं आज प्रिय नाम तुम्हारा

कह दे जगती विषम कुछ आज मुझे
रखना ना हृदय में कुछ भार प्रिय
अपराधिनी बन स्वयं की स्व को छलुं
कहो कैसे अपनी ही नज़रों से गिरूं

हाय! आरक्त कपोल देख
क्या तुम्हें दया न आएगी
लज्जानत आनन पर भी
क्या मान-दर्प दिखलाएगी

जाओ फिर हौसला नहीं , अब इससे अधिक
मानिनि मैं भी कुछ,अबला नहीं इससे अधिक

मान भी जाओ प्रिय ना अब यों तुम दुष्ट बनो
रीति जा रही प्रेम घड़ी ना अब मुझसे रूष्ट रहो

                                   — रजनी सिंह 

FB IMG 15224884765777902 - Banka Live

——————————————————————-

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button